About Bhagat Singh In Hindi एक महान क्रन्तिकारी भगत सिंह

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About Bhagat Singh In Hindi एक महान क्रन्तिकारी भगत सिंह About Bhagat Singh In Hindi एक महान क्रन्तिकारी भगत सिंह

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भगत सिंह के जीवन का रूप रेखा 

  परिचय 

 परिचयभगत सिंह का  बचपन

भगत सिंह का शिक्षा

भगत सिंह का जीवन 

भगत सिंह के फांसी के बाद का समय 

भगत सिंह की डायरी 

 

भगत सिंह एक ऐसा क्रांतिकारी  थे  जिसने अंग्रजो का छक्के छुड़ा दिए थे। देश के युवापीढ़ी के एकीकरण के लिए हस्ते हस्ते फांसी पर चढ़ गए।  अंग्रेज के खिलाफ भगत सिंह का विचारधारा और देशभक्ति के जूनून ने पुरे देश में क्रांति का लहर पैदा कर दिया।  भगत सिंह उन क्रांतिकारियों में से एक था जिन्होंने कभी अंग्रेज का पराधिनता स्वीकार नहीं किया और नहीं अपने विचारधारा के साथ समझौता किया।  गुलाम भारत में भी अगर अंग्रेज के अंदर डर का खौफ था तो वो भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी की वजह से भगत सिंह ने अपना जीवन अंग्रेज सरकार की तबाही और देश की आजादी के लिए युवा पीढ़ी में एकता और जागरूकता के लिए कुर्बान कर दिया।  

  परिचय 

भगत सिंह का जन्म :- 23 सितम्बर 1907 को लायलपुर जिला के बंगा में में हुवा था।  जो अब  वर्तमान में पाकिस्तान  का हिस्सा है  

पिता का नाम :- सरदार किशन सिंह 

माता का नाम :- विद्यावती कौर 

चाचा का नाम :- सरदार अजित सिंह 

कार्य :- भारतीय स्वतंत्रता सेनानी 

मृत्यु :- 23 मार्च 1931 को देश की आजादी के लिए  अपने दो  मित्रों के साथ फांसी पर चढ़ गये।  राजगुरू और  बटुकेश्वर दत्त 

सरदार भगत सिंह :- भगत सिंह एक ऐसा इतिहास का पन्ना है।  जो साहस  आत्मविश्वाश , समर्पण और बलिदान के लिए याद किया जाता है  एक ऐसा इतिहास जिसके बारे में जब भी जिक्र होता है दिल में एक शैलाब  सुलगाने लगता है।  भगत सिंह को इतिहास के पन्नो में एक ऐसा क्रांतिकारी के रूप में जाना जाता है जिनका विचारधारा आज भी हर युवा पीढ़ी का सोच है 

About Bhagat Singh In Hindi एक महान क्रन्तिकारी भगत सिंह

भगत सिंह का  बचपन :- भगत सिंह बचपन से ही वीर और साहसी थे। उनका पिता एक किसान था और साथ ही साथ एक आंदोलनकारी  भी था।  भगत सिंह बचपन से ही अंग्रेजो  द्वारा किसान मजदूरों पर जुल्म सितम देखते आया था। भगत सिंह स्कुल में भी बाकि बच्चों से काफी अलग थे।  छोटी सी उम्र में ही बड़ी  बड़ी  बाते करना, बचपन से ही देश प्रेमी था।  जब भी कही पर अग्रेजो द्वारा लोगों पर अत्याचार देखता था उनका मन क्रोध से भर जाता था 

भगत सिंह का शिक्षा 

भगत सिंह ने प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव के स्कुल से ही हासिल किया था फिर कॉलेज के पढ़ाई के लिए लाहौर के डीएवी कॉलेज में दाखिला करा दिया।  स्कुल से लेकर कॉलेज के दिनों में भी   कई बार उनका अंग्रेजी बच्चो से तकरार हुआ।  एक बार अंग्रेजी बच्चों ने भगत सिंह के एक दोस्त का मजाक उडाया था तो उनकी खूब पिटाई करके बदला पूरा किया था 

भगत सिंह का जीवन 

 भगत सिंह जब 12 साल का था 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में  जलियावालाबाग हत्या कांड हुवा था जिसमें जनरल डायर ने जलियावालाबाग में हो रही सभा पर गोली चलवा दिया था जिसमें अनगिनत लोग मरे गए थे।  इस घटना ने भगत सिंह को बहुत ही प्रभावित कर दिया था।  जिस्से उनका अंग्रेजी सत्ता के खिलाप घृणा और ज्यादा बढ गया था।  

 1 अगस्त 1920 ई को को जब गांधीजी ने असहयोग आंदोलन  चलाया था।  भगत सिंह भी इस आंदोलन में भाग लिया था जो एक नॉन कॉर्पोरेशन मूमेंट आन्दोलन था जिसमें गांधीजी ने सभी भारतीय से अपील किया था

कोई भी हिन्दुस्तानी ब्रिटिश सरकार का साथ न दे 

हर कोई सरकारी नौकरी छोड़ दे 

मजदुर फैक्टरियों  से निकल आए 

बच्चे सरकारी स्कुल में जाना बंद कर दे 

सभी विदेशी कपड़े जला दे 

कोई भी व्यक्ति किसी तरह का टैक्स न दे 

5 फरवरी 1922 को गोरखपुर जिले में चोरी चोरा नामक जगह पर एक हत्याकांड हो गया जिसमें लोगो ने पुलस स्टेशन में आग लगा दिया जिसमे एक थाना अधिकारी के साथ कई पुलिस वाले की मृत्यु हो गया।  गांधीजी ने इस घटना से दुखी होकर असहयोग आन्दोलन ये कह कर वापस ले लिया की अभी हमारा देश स्वत्रंत्रता के लिए तैयार नहीं है भगत सिंह को जब यह पता चला कि गांधी जी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया है तो वो गांधीजी से निराश होकर उनका साथ छोड़ दिया और फिर अंग्रेजो को सबक सिखाने के लिए हिंसात्मक क्रांतिकारी का राह अपना लिया

30 अक्टूवर 1928 को जब साइमन कमिशन भारत आया था उसी समय लालाराजपत राय की अध्यक्षता में एक जोर का आन्दोलन पूरे देश में सुलगी थी जिसमें लोगो ने लालाराजपत राय के साथ साइमन कमिशन वापस जाओ का नारे बाजी किया इस आन्दोलन में अंग्रेजो द्वारा लाठी चार्ज करवाया गया जिसमें लालाराजपत राय बुरे तरीके से घायल हो गया और फिर उनका मृत्यु हो गया। लालाराजपत राय ने कहा था मेरे शरीर पर पड़ी एक एक लाठी ब्रिटिश सरकार के ताबूत में एक एक कील का काम करेगी। इस घटना ने तो मानो भगत सिंह को अंदर से पूरे तरीके से झंझोर दिया। और फिर भगत सिंह अपने साथियों के साथ इस घटना के मास्टर माइंड जॉन सॉण्डर्स  को जान से मारने का फैसला ले लिया 

17  दिसंबर  1928  ई को भगत सिंह के नवेतृत्व में उनके क्रन्तिकारी साथी ने मिलकर सॉण्डर्स को गोली मार कर हत्या कर दी 

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भगत सिंह ने 1928 में ही दिल्ली के  फिरोजशाह कोटला में हिंदुस्तान सोसलिस्ट  रिपब्लिक एसोसिएशन की स्थापना की जिसका मकसद था  पूर्ण स्वत्रंत्रता ताकि किसान और मजदुर को भी उनका सम्पूर्ण हक मिल सके 

8 अप्रैल 1929 ये वो दिन है जब  दिल्ली के सेंट्रल असम्ब्ली में पब्लिक  सेफ्टी बिल के नाम पर जन आंदोलन को शांत करने के लिए सिर्फ  नाम का बिल पास हो रहा था इसी बिल  के विरुद्ध में  भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली के सेंट्रल असेम्ब्ली में हो रही सभा में खली टेबल पर बम फेका और साथ में पर्चा फेंका था जिसमें उसने लिखा था की मेरा मकसद किसी का जान लेना नहीं है बल्कि हमारा जनक्रांति का  संदेश बहरी सरकार के कानों तक पहुँचना है  और फिर अपनी गिरफ़्तारी दिया 

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अंग्रेजी सरकार द्वारा  26 अगस्त 1930 को भारतीय दंड सहिंता धारा 129 ,302 तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम धारा 4 और 6 तथा आईपीसी की धरा 120 के तहत अपराधी सिद्ध किया 

7 अक्टूबर 1930 को भगत सिंह  राजगुरू और  बटुकेश्वर दत्त को फांसी की सजा और बाकियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई 

23 मार्च 1931 को शाम 7 बजकर 34 मिनट पर तीनो महान क्रन्तिकारी भगत सिंह  राजगुरू और  बटुकेश्वर दत्त को फांसी दे दिया गया।  फांसी से पहले तीनों ने आपस में गले मिले और फिर इन्कलाब  जिन्दाबाद  का नारा लगाया  इस प्रकार भगत सिंह  राजगुरू और  बटुकेश्वर दत्त ने अपने देश की आजादी के लिए अपने जीवन को राष्ट के नाम कर दिया 

फांसी के बाद का समय 

 भले ही अंग्रेजी सरकार ने  भगत सिंह  राजगुरू और  बटुकेश्वर दत्त को फांसी देकर तत्कालिक जीत हासिल कर लिया था लेकिन उनका बलिदान ने सम्पूर्ण देश में आजादी की अंधी इतनी तेज कर दिया की अंग्रेजी सरकार का पाँव डगमगाने लगा 

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 भगत सिंह के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी 

भगत सिंह एक मात्र ऐसा क्रन्तिकारी था जिसने मरने से पहले और मरने के बाद भी  अंग्रेजी हुकूमत के अंदर डर का खौफ पैदा कर दिया था 

भगत सिंह आखिरी साँस तक अपने क्रांतिकारी विचारों के साथ अंग्रेजी हुकूमत का सामना किया 

भगत सिंह ने अपने  पत्रिका मै नास्तिक क्यों हूँ में पूँजीवादी लोगों का विवरण किया है जिसमे उसने पूँजीवादी को स्वार्थी और सत्ता का लोभी होने का जिक्र किया है 

 इन्कलाब  जिन्दाबाद का नारा भगत सिंह ने दिया था 

भगत सिंह ने 1928 में ही दिल्ली के  फिरोजशाह कोटला में हिंदुस्तान सोसलिस्ट  रिपब्लिक एसोसिएशन की स्थापना किया था 

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भगत सिंह पर निबंध

भगत सिंह एक ऐसा नाम है जिसे देश में एक क्रन्तिकारी विचारधारा के नाम से जाना जाता है।  भगत सिंह देश की आजादी के लिए  छोटी सी उम्र में ही शहीद होकर अपना जीवन राष्ट के नाम कर दिया। भगत सिंह का विचारधारा भले ही  गांधी विरोधी था लेकिन देश की आजादी के लिए भगत सिंह का विचारधरा युवा पीढ़ी को एक नई दिशा दिया एक क्रन्तिकारी विचार भगत सिंह का मै जनता हूँ सत्य और अहिंसा का विचार उत्तम है लेकिन हमें समय के माँग को भी समझना जरुरी है शांति के लिए हमें कभी कभी युद्ध करना परता है।  रक्त बहानी परती है ताकि आने वाला भविष्य अपना जीवन नये शिरे से शुरू कर सके।  शांति और समृद्धि स्थापित कर सके।   भगत सिंह  बचपन से ही एक प्रभावशाली विचारधरा का था।  अपने दोस्तों के नैतृत्व करने में उसे बहुत मजा आता था देश के क्रन्तिकारी के लिए हमेशा उनके मन में सम्मान रहता था।  भगत सिंह एक ऐसा राष्ट का निर्माण चाहता था जिसमें गरीब और मजदूर भी अपना हक़ और सम्मान के साथ जी सके।  जब भी भगत सिंह किसी गरीब किसान , मजदूर पर अत्याचार होते देखता उनका मन क्रोधित हो जाता था ब्रिटिश सरकार का जुल्म का दास्ता आम लोगो पर कहर बन कर बरस रहा था।  जलियावालाबाग हत्या कांड और लालराजपत का मृत्यु जैसे घटना ने भगत सिंह के सामने युद्ध का एक चुनौती स्थापित कर दिया।  भगत सिंह एक ऐसा क्रन्तिकारी था  जिसका खोप अंग्रेजो में हमेशा रहता था।  

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भगत सिंह की डायरी 

शहीद ए आजम भगत सिंह की डायरी में अंग्रेजी हुकूमत , राजशाही  , आम लोगो का शोषण और  साम्राज्यवादी  के खिलाफ लिखी कई पत्र है जिसमे भगत सिंह ने पूंजीवादी और साम्राज्यवादी  का खुला  रूप में विरोध किया है 

भगत सिंह ने अपने डायरी में बताया है की कैसे पूँजीपति जैसे ताकतवर लोग सत्ता का गलत उपयोग करके आम लोगो क शोषण करता है भरष्टाचार को जन्म देता है 

भगत सिंह ने अपने डायरी में कई पूँजीपति लोगो को अंग्रेजी सरकार का मित्र बताया है 

भगत सिंह  ने अपने डायरी में आजादी का जिक्र करते हुवे कहा है की मुझे पूर्ण विश्वास है की मेरे बाद भी मेरा विचारधारा आजादी के लिए एक नयी क्रांति को जन्म देगा   

भगत सिंह ने अपने  पत्रिका मै नास्तिक क्यों हूँ में पूँजीवादी लोगों का विवरण किया है जिसमे उसने पूँजीवादी को स्वार्थी और सत्ता का लोभी होने का जिक्र किया है 

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लेखक के बारे में

  • Princi Soni

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