MP News: इंदौर रिंग रोड प्रोजेक्ट में आई मुसीबत, मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिले किसान नगद मुआवजा की रखी मांग

मध्य प्रदेश में रिंग रोड प्रोजेक्ट को लेकर एक मुसीबत सामने आई है। जिसमें कि किसानों ने मुआवजे की मांग को लेकर आवाज उठाई है। इंदौर में पश्चिमी रिंग रोड पर प्रोजेक्ट चल रहा है। इंदौर में किसानों ने अपनी बात को जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट जी के सामने रखी है। किसानों का कहना है कि हमें नगद मुआवजा चाहिए।

रिंग रोड की जमीन के मामले में किसानों ने उठाई आवाज

इंदौर शहर के आसपास बनने वाले रिंग रोड की जमीन के मामले में भारतीय किसान संघ के लोगों ने सांसद शंकर लालवानी से मुलाकात की। इंदौर जिला अध्यक्ष ने सरकार को रिंग रोड की योजना के तहत शहर के आसपास की जमीनों को कम दाम में खरीदने के बाद बताई है। उन्होंने कहा कि सरकार की यह मंशा नहीं चलेगी और किसानों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई है। किसानों ने अपनी जमीन को अपने दामों पर नहीं देने का फैसला किया है।

यहाँ तक कि कुछ किसानों की जमीन पर गाइडलाइन के मुताबिक अंडरग्राउंड फसलें भी हैं जिन पर सरकार को कोई जानकारी नहीं है। इसके अलावा, इस मुद्दे पर परिणाम के लिए सांसद और मुख्यमंत्री के पास गए हैं। इस पर सरकार से रोक लगाने और किसानों के अधिकारों की रक्षा की मांग की जा रही है।

रिंग रोड को लेकर किसानों की जमीन के मामले

इंदौर शहर के आसपास निकलने वाले रिंग रोड को लेकर किसानों की जमीन के मामले में भारतीय किसान संघ के लोगों ने बुधवार को सांसद शंकर लालवानी से मुलाकात की है। और सरकार पर कई आरोप लगा दिए है। भारतीय किसान संघ के इंदौर जिला अध्यक्ष कृष्णपाल सिंह राठौर ने कहा है कि सरकार रिंग रोड की योजना पर शहर के आसपास की जमीनों को ओने पोने दाम में छीनने की कोशिश कर रही है।

जमीनों के भाव एक करोड़ से लेकर 5 करोड रुपए प्रति बीघा

किसानों का कहना है कि जिन जमीनों के भाव एक करोड़ से लेकर 5 करोड रुपए प्रति बीघा है। सरकार उनके भाव गाइडलाइन का दोगुना भी नहीं दे रही है मध्य प्रदेश सरकार किसानों से बहुत कम दामों में उनकी जमीन ले रही है। मतलब यह है कि जमीनों की कीमत करोड़ों रुपए है। वहां पर किसानों को लाखों रुपए देकर उनसे उनकी जमीन ली जा रही है। किसानों का कहना है कि हम लोग जागृत हैं और हमें अपने अधिकारों के बारे में पता है किसानों का कहना है। यदि सरकार हमसे जमीन लेना ही चाहती है तो सही दामों पर ले जो दाम की बाजार में चल रहे हैं।

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किसान की विडंबना

किसानों का कहना है कि यदि सरकार हमसे जमीन लेना चाहती है। तो वह बाजार मूल्य पर बात कर किसान कम कीमत में अपनी जमीन देने को राजी नहीं है। इसके साथ ही उनका कहना है कि किसान की विडंबना है कि उनको कुछ पता ही नहीं है कि उनकी जमीनों पर खड़ी फसल में खंबे गाड़ दिए गए हैं।

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