MP में आ रहा नया फोरलेन हाईवे: किसानों की जमीन पर लगी रोक, जानिए किन गांवों को होगा सीधा फायदा

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MP News: रीवा-सीधी के बीच नया फोरलेन हाईवे बनने जा रहा है, लेकिन इसकी शुरुआत ने दर्जनों गांवों के किसानों की ज़िंदगी में हलचल मचा दी है। जमीन की खरीद-बिक्री पर अचानक लगी रोक ने सबको चौंका दिया है। अब सवाल है क्या ये प्रोजेक्ट लोगों के लिए वरदान बनेगा या चिंता का कारण?

रीवा-सीधी टू लेन अब बनेगा चौड़ा फोरलेन

मध्यप्रदेश में रीवा से सीधी जाने वाला प्रमुख टू लेन हाइवे अब फोरलेन में तब्दील होने जा रहा है। ये बदलाव सिर्फ एक सड़क निर्माण नहीं, बल्कि सैकड़ों लोगों के जीवन और भविष्य से जुड़ा मसला बन गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस परियोजना को हरी झंडी दे दी है, जिसमें पुराने प्रस्तावित बायपास को हटाकर मौजूदा सड़क का ही चौड़ीकरण किया जाएगा।

देखें किन गांवों में ज़मीन की खरीद-बिक्री पर रोक

इस हाईवे परियोजना का सबसे बड़ा असर उन किसानों पर पड़ा है, जिनकी ज़मीनें इस रास्ते में आती हैं। रीवा जिले की गुढ़ तहसील के 20 से ज्यादा गांवों में ज़मीन की खरीद-फरोख्त पर 6 महीने पहले से ही रोक लगा दी गई है। इनमें प्रमुख गांव हैं: पकरा, बंजारी, नारायणपुर, अमिलिहा, बरिगवां, खड्डा, उमरी (अवधेशपुर), महसांव, पुरास, बदवार, बरसैतादेश और बड़ागांव आदि। भूमि का बटांकन, डायवर्जन और रजिस्ट्री जैसे सारे काम पूरी तरह से रोक दिए गए हैं।

देखें किन ज़मीनों का होगा अधिग्रहण?

फोरलेन हाईवे बनने के लिए सड़क के किनारे की जमीनें अधिग्रहित की जाएंगी। कुछ इलाकों में ये अधिग्रहण एक तरफ से होगा, तो कुछ जगहों पर दोनों तरफ बराबर जमीन ली जाएगी। इससे न केवल सड़क चौड़ी होगी बल्कि आने-जाने वाले वाहनों को बेहतर स्पेस मिलेगा। गांव वालों के लिए ये योजना दोहरी तलवार जैसी है एक तरफ मुआवजे की उम्मीद, दूसरी तरफ पुश्तैनी ज़मीन खोने का डर।

देखें क्या होंगे इसके फायदे?

इस फोरलेन हाईवे के बनने से रीवा और सीधी के बीच की दूरी तो नहीं घटेगी, लेकिन यात्रा का समय जरूर कम होगा।

  • ट्रैफिक जाम की समस्या घटेगी

  • एक्सीडेंट के केस कम हो सकते हैं

  • व्यापार और मालवाहक गाड़ियों की आवाजाही आसान होगी

इसके अलावा गांवों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जिससे स्थानीय रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर होगी।

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बहुत से किसानों का कहना है कि बिना पर्याप्त जानकारी और विकल्प के जमीन की रजिस्ट्री पर रोक लगाना अन्याय है।
“अगर जमीन अधिग्रहित करनी ही है तो पहले मुआवजा तय करें,” — यही आवाजें सोशल मीडिया से लेकर गांव की चौपालों तक गूंज रही हैं।

दूसरी ओर, कुछ लोग इस प्रोजेक्ट को विकास का संकेत मानते हैं। उनका मानना है कि इससे रीवा और सीधी का भविष्य बदलेगा, बशर्ते किसानों को उनका हक मिले।

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क्या सरकार को पहले मुआवजा देना चाहिए था? या ये प्रोजेक्ट रीवा-सीधी के लिए वरदान साबित होगा? नीचे अपनी राय ज़रूर शेयर करें और ऐसी ही महत्वपूर्ण खबरों के लिए जुड़े रहें अपना कल के साथ। 

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