MP News: मध्य प्रदेश पटवारी भर्ती में नहीं हुआ कोई घोटाला, हाई कोर्ट ने नियुक्तियों के दिए निर्देश

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के पहले पटवारी भर्ती घोटाला सामने आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी ने नियुक्तियों पर पर रोक लगा दी थी। लेकिन अब सामान्य प्रशासन विभाग की जांच के बाद हाई कोर्ट ने नियुक्तियों का रास्ता साफ कर दिया है।

जांच में नहीं आया किसी भी तरह का घोटाला

पटवारी भर्ती में सामान्य प्रशासन रिपोर्ट की जांच के अनुसार किसी भी तरह का घोटाला सामने नहीं आया है। हालांकि पहले आरोप लगाया जा रहा था कि एक ही परीक्षा केंद्र के टॉप 10 परीक्षार्थी मेरिट लिस्ट में है जिसकी वजह से सभी घोटाले की उम्मीद लगाए बैठे थे। और विधानसभा चुनाव के पहले हंगामा शुरु हो गया था। जिसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी ने मामले की जांच होने तक नियुक्तियों पर रोक लगा दी थी।

मध्य प्रदेश पटवारी भर्ती घोटाला सामने आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी ने मामले की जांच के निर्देश देते हुए हाई कोर्ट के जस्टिस श्री राजेन्द्र वर्मा जी को जांच कमेटी का प्रमुख नियुक्त किया।

जांच कमेटी के अनुसार किसी भी तरह का घोटाला नहीं हुआ

मध्य प्रदेश पटवारी भर्ती घोटाले में जांच कमेटी का गठन किया गया और जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट जारी करते हुऐ यह कहा कि एक ही परीक्षा केंद्र से मेरिट में आए परीक्षार्थियों ने अलग-अलग समय पर परीक्षाएं दी थी और इसी वजह से सामूहिक नकल का मामला नहीं कहा जा सकता। एक विशेष परीक्षा केंद्र पर 144 परीक्षार्थियों का चयन होना केवल एक संयोग है। यह किसी भी तरह का संदिग्ध मामला नहीं है। क्योंकि अन्य परीक्षा केंद्रों पर 200 से ज्यादा परीक्षार्थियों का चयन भी हुआ है।

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क्या है मध्य प्रदेश पटवारी घोटाला

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2022 के नवंबर में कर्मचारी चयन आयोग द्वारा पटवारी सहित ग्रेट 3 के कुल 9200 पदों के लिए रिक्तियां जारी की गई थी जिसमें 15 मार्च से 26 अप्रैल तक परीक्षाएं ली गई। जिसमें कुल 12 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने आवेदन किया और परीक्षा में 978000 उम्मीदवार शामिल हुए। और 30 जून 2023 को परीक्षा का परिणाम सामने आया जिसमें 8617 पदों के लिए मेरिट सूची जारी की गई थी।

लेकिन मध्य प्रदेश में पटवारी भर्ती को संदिग्ध तब माना गया जब ग्वालियर के एक ही कॉलेज से 10 में से 7 टॉपरों के नाम सामने आए। और इसी वजह से धांधली का आरोप सरकार के ऊपर लगाया गया। विधानसभा चुनाव के पहले मामला इतना ज्यादा बढ़ गया की पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी को जांच के निर्देश देने पड़े और पटवारी भारतीयों में होने वाली नियुक्तियों पर रोक लगानी पड़ी थी।

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