स्वदेश प्रेम पर निबंध 500 शब्दों में | Swadesh Prem In Hindi 2023

Last Updated on 2 weeks ago

स्वदेश प्रेम पर निबंध 500 शब्दों में | Swadesh Prem In Hindi – अपने देश के प्रति प्रेम, भक्ति और लगाव की भावनाओं को देशभक्ति के रूप में जाना जाता है। इस लगाव में कई तरह की भावनाएँ और शब्द शामिल हो सकते हैं जो किसी के अपने देश से जुड़े हों, जैसे कि जातीय, सांस्कृतिक, राजनीतिक या ऐतिहासिक तत्व।

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हमारा प्राथमिक उत्तरदायित्व यह है कि हम जिस राष्ट्र या समाज में पैदा हुए हैं, उसके विकास में उचित योगदान दें। किसी के देश के प्रति प्रेम या देशभक्ति का प्राथमिक स्रोत उसके प्रति कर्तव्य की भावना है। एक देश नक़्शे पर दर्शाए गए ज़मीन के एक सपाट, निर्जीव क्षेत्र से कहीं अधिक है।

स्वदेश प्रेम क्या है इनका क्या अर्थ होता है

स्वदेश का अर्थ होता है अपना देश अर्थात अपनी मातृभूमि। यह वह देश होता है जहां हम पैदा होते हैं, जहां की धूल मिट्टी में हम पलते हैं तथा बड़े होते हैं। जन्म देने वाली माता तथा जन्म देने वाली भूमि की महिमा को स्वर्ग से भी बढ़कर माना जाता है। जिस देश की मिट्टी में हम लोट-लोट कर बड़े होते हैं, जहां का अन्नन खाकर तथा अमृत के समान जल पीकर, सुखद वायु का सेवन करके हम बलवान होते हैं, हम सदा उनके ऋणी होते हैं उनके ऋण से हम कभी मुक्त नहीं हो सकते हैं। अतः ऐसे स्वदेश से हम कितना भी प्रेम करले तथा उनका कितना भी सेवा करले वो कम ही पड़ेगा।

Swadesh Prem In Hindi

स्वदेश प्रेम पर छोटा बड़ा निबंध 500 शब्दों में 

स्वदेश प्रेम की भावना: स्वदेश प्रेम से हमारा मतलब है, देश के हर तथ्यों से प्रेम करना देश के सभी झोपड़ियों से, महलों से, संस्थाओं से प्रेम करना, देश के रहन-सहन, रीति-रिवाज, वेशभूषा से प्रेम, देश की सभी धर्मो, मतों, भूमि, पर्वत, नदी, वन, लता सभी से प्रेम और अपनापन रखना उनसब के प्रति गर्व की अनुभूति करना सच्चे देश प्रेमी के लिए देश का कण- कण पावन और पूज्य होता है। स्वदेश प्रेम की भावना से प्रेरित व्यक्ति अपने देश के लिए अपनी जान निछावर करने से भी कभी पीछे नहीं हटते हैं। इसी भावना से प्रेरित होकर महाराणा प्रताप हजारों कास्ट और मुसीबत का सामना करने के बावजूद भी अपने स्वदेश के लिए आखिरी समय तक लड़ते रहे तथा शहीद भगत सिंह इसी स्वदेश प्रेम की भावना के कारण हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए थे। स्वदेश प्रेम की यह भावना केवल मनुष्य में ही नहीं अपितु संसार के समस्त जीव धारियों में भी होता है, पशु-पक्षी जो अपना आशियाना छोड़कर दिन भर भ्रमण करते हैं और जैसे ही शाम होते हैं वह अपना आशियाना वापस लौट आते हैं। अपने देश से दूर रहने वाले व्यक्ति हमेशा स्वदेश प्रेम की भावना से पीड़ित रहता है।

स्वदेश प्रेम हम किस प्रकार से कर सकते हैं

स्वदेश प्रेम की भावना से भरे मन देश के लिए सच्चा निष्ठा और भावना रखते हैं ऐसे व्यक्ति अपने देश हित के लिए अपना जान निछावर करने से भी पीछे नहीं हटते हैं आज के आधुनिक युग में कई प्रकार से स्वदेश प्रेम देखने को मिलता है, इनमें से कुछ तो केवल स्वदेश प्रेम का ढोंग करते हैं समय पड़ने पर इधर उधर छुप जाते हैं। वास्तव में जो सच्चा स्वदेश प्रेमी होते हैं वही देश हित चाहते हैं, देश हित के कार्य में तन मन और धन से लग जाते हैं, हमारा इतिहास ऐसे अनेकों सूरवीर की कथाओं से भरे हुए हैं, जिनका हृदय केवल देश प्रेम की भावना से प्रेरित रहता था। महाराणा प्रताप ने घास की रोटी खाना पसंद किया लेकिन कभी अपने शत्रु के सामने अपने मस्तक नहीं झुकाया, शिवाजी महाराज देश और मातृभूमि की रक्षा के लिए गुफाओं में रहकर शत्रु से लोहा लिया और रानी लक्ष्मीबाई ने महिलाओं की सुख को त्याग कर शत्रुओं को लोहा लेते हुए वीरगति प्राप्त की, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव,सुभासचंद्र बोस आदि अनेकों वीरों ने स्वदेश प्रेम से प्रेरित होकर अपने देश की उन्नति के लिए बेहतर भविष्य के लिए हंसते हंसते मौत को अपने गले लगा लिया

देश के प्रति प्रेम भावना

हम देश की सेवा विभिन्न स्थितियों में रहते हुए भी कर सकते हैं, अगर मन में देश के प्रति सच्ची भावना और निष्ठा हो, देश प्रेम का क्षेत्र अत्यंत व्यापक है, व्यक्ति विभिन्न तरीके से अपनी देशभक्ति की भावना को प्रदूषित कर सकते हैं। सैनिकों द्वारा मातृभूमि के लिए अपने प्राणों का बाजी लगाकर, राजनेताओं द्वारा राष्ट्र निर्माण के लिए एक मजबूत रणनीति बनाकर, समाज सुधारक द्वारा समाज का नवनिर्माण करके, धार्मिक नेताओं द्वारा मानवता को उच्च आदर्श बनाकर, साहित्यकार द्वारा जन जागरण पर अपनी विचारधारा प्रस्तुत करके, कर्मचारी, श्रमिक एवं किसान द्वारा निष्ठा पूर्वक अपने दायित्व का निर्वाह करके, व्यापारी द्वारा मुनाफाखोरी एवं तस्करी का त्याग कर अपना देश भक्ति प्रदर्शित कर सकता है। स्वदेश प्रेम की भावना देश की नीति और उन्नति दोनों को ही मजबूत और प्रगतिशील बनाती है। देश सर्वोपरि है, यह नीति रखने वाले व्यक्ति देश के लिए अपना सब कुछ निछावर कर सकता है यही सच्ची देशभक्ति और सच्ची देश सेवा है।

उपसंहार

आज के पीढ़ी में देश प्रेम की भावना अत्यंत दुर्लभ होती जा रही है, नई पीढ़ी द्वारा पश्चिमी सभ्यता को ज्यादा महत्व देना, विदेशी वस्तुओं के प्रति उनका रुझान, स्वदेश की वजह विदेश में जाकर उनका सेवा अर्पित करने के सजीले सपने वास्तव में चिंताजनक है।
लेखक रामनरेश त्रिपाठी कहते थे।

विषुवत रेखा का वासी जो जीता है, नित्य हाफ हाफ कर।
रखता है अनुराग अलौकिक, वह भी अपनी मातृभूमि पर।।
ध्रुववासी जो हीम में, तप में, जी लेता है काप काप कर।
वह भी अपने मातृभूमि पर, कर देता है प्राण निछावर।।

अपना देश चाहे वह रेत से भरा हो या फिर बर्फ से ही क्यों न ढाका हो। फिर भी वह अपने प्राणों से ज्यादा प्रिय होता है।

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लेखक के बारे में

  • Princi Soni

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