शिवराज सिंह चौहान द्वारा पीड़ित आदिवासी के पैर धोना, संवेदनशीलता या चुनावी मास्टरस्टोक?

चुनावी माहौल के बीच एक बीजेपी कार्यकर्ता द्वारा आदिवासी युवक के ऊपर पेशाब करना और फिर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी के द्वारा पीड़ित युवक को सीएम आवास में बुलाना, पैर धुलवाना, गिफ्ट देना और खाना खिलाना सहित तमाम अन्य कार्य सीएम शिवराज की संवेदनशीलता है या फिर एक राजनीतिक मजबूरी है आज हम इस बारे में गहन विचार करने वाले हैं। कांग्रेस इस घटना को दिखावा करार दे रही हैं लेकिन ये आने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से मास्टरस्टोक साबित हो सकता है।

मध्यप्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के चलते बीजेपी, कॉन्ग्रेस साहित सभी पार्टियां चुनाव के प्रचार प्रसार में जुड़ी हैं। और दूसरी तरफ मध्यप्रदेश के सीधी जिले में एक ऐसी घटना का वीडियो वायरल हो जाता है जिसे देख सभी की आंखे फटी के फटी रह जाती हैं। इस वायरल वीडियो में बीजेपी कार्यकर्ता प्रवेश शुक्ला नशे में धुत होकर एक आदिवासी व्यक्ति के ऊपर पेशाब कर रहा है। ये पूरा विडियो इतना ज्यादा घिनौना था कि जिसने भी इस विडियो को देखा उन्होंने प्रवेश शुक्ला सहित उनके मां बाप को संस्कार का पाठ पढ़ाने का उपदेश दिया।

शिवराज सिंह की संवेदनशीलता या चुनावी मास्टरस्टोक

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा आदिवासी के प्रति जिस तरह की संवेदनशीलता दिखाई गई है वह काबिले तारीफ है उन्होंने अपने इस कार्य से प्रदेश की हर लोगों का दिल जीत लिया है और पूरे देशवासी इस घटना से शर्मसार हुए थे लेकिन सीएम शिवराज सिंह द्वारा इस संवेदनशीलता की सभी मिशाल दे रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ जिस तरह से शिवराज सिंह चौहान ने पूरे मामले को संभालने की कोशिश की है उसके सियासी मायने भी निकाले जा रही हैं।

क्योंकि मध्यप्रदेश एक ऐसा राज्य है जहां पर आदिवासी आबादी बहुत ज्यादा है यहां पर 46 मान्यता प्राप्त जनजातियां है और इस पेशाब कांड की वजह से अनुसूचित जनजातियां उनसे काफी ज्यादा नाराज हैं और इन जनजातियों की नाराजगी सीएम शिवराज पर भारी पड़ सकती है इसलिए सत्ता को बरकरार रखने की चुनौती सामने जूझ रही है।

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कमलनाथ बोले ये कैमरा के समाने का नाटक है

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ जी के द्वारा शिवराज सिंह चौहान ने जिस तरह से पीड़ित आदिवासी को CM आवास बुला करके उनके साथ खाना खाया और उनके पैर धोए इन सभी घटना को कैमरे के सामने का नाटक करार दिया जा रहा है उन्होंने इतना कहा कि इसे उनके कार्यकाल के दौरान किए गए पाप धुल नहीं पाएंगे।

प्रवेश शुक्ला की इस हरकत से पूरा देश शर्मसार हैं आजादी के 75 साल बाद भी अगर देश में इस तरह का भेदभाव होता है और इस तरह की घटनाएं होती हैं तो समाज के हर एक जाति हर एक धर्म के लोगों के लिए गंभीर मंथन करने की बात है।

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सीधी की घटना जीवन की गरिमा और सम्मान के साथ जीने की मौलिक अधिकार के साथ ही नौसर्गिक नियमों के खिलाफ है आप इस बारे में क्या विचार रखते हैं हमें कमेंट करके जरूर बताइए और इस तरह की खबरों के लिए हमारे सोशल मीडिया अकाउंट को फॉलो करें। और इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर कीजिए ताकी सभी देश वासियों को इस घटना की जानकारी हो।

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