भारत का नया संसद भवन जहाँ हर चीज की अपनी अलग खासियत, जानिये भवन निर्माण का खर्च और समय

नमस्कार दोस्तों भारत के लिए आज 28 मई 2023 एक ऐतिहासिक दिन है क्योंकि भारत देश के नए ससंद का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा उद्घाटन किया गया है। नया संसद भवन त्रिभुजाकार का है जो 64,500 वर्गमीटर में बना हुआ है। नई दिल्‍ली में बना नया संसद भवन पुरानी इमारत के ठीक बगल में बना है। देखने में यह संसद भवन बहुत ही भव्य लगता है तो तो सोचिये अंदर कितनी बारीकियों से काम किया गया होगा। कहा जाय तो यह नया संसद भवन अपने आप में लाजवाब है क्योंकि इसे बनाने के लिए भारत देश के हर राज्य के ऐतिहासिक आधार शिलाओं का और सामान का उपयोग किया गया है। 

नया संसद भवन कुल 4 मंजिला ईमारत है इस भवन का त्रिभुजाकार होने की वजह से इसमें मुख्य रूप से 3 गेट बनाये गए हैं। इन तीनों गेटों के नाम शक्ति द्वार, ज्ञान द्वार और कर्म द्वार रखा गया है साथ ही इसमें वीआईपी एंट्री के लिए अलग प्रवेश द्वार रखा गया है। नए संसद भवन का निर्माण कार्य दिसंबर 2020 में शुरू हुआ था और आज इसका उद्घाटन हो गया है लगभग 2 साल 6 महीने में इसका काम कम्पलीट कर दिया गया जो अपने आप में एक इतिहास है। 

नए संसद भवन की क्षमता 

971 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित, नए संसद भवन का फर्नीचर ऐसे तैयार किया है कि लोकसभा में 888 और राज्यसभा में 384 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था है। वहीं, संयुक्त सत्र के दौरान लोकसभा भवन में 1,272 सदस्यों के बैठने का इंतजाम है।

संसद में स्‍थापित हुआ सेंगोल

भारत के पुराने इतिहास में संगोल का उपयोग बताया गया है कि चोल साम्राज्य में राजा का राज्याभिषेक के दौरान सेंगोल का इस्तेमाल किया जाता था। उस समय सेंगोल को सत्ता का प्रतीक माना जाता था, इसलिए जब भी एक राजा दूसरे राजा को सत्ता सौंपता था तब सेंगोल दिया करते थे। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को काफी प्रभावित किया इसलिए उन्होंने इस बात का पूरा प्रमाण लिया और अंततः उन्होंने इस सेंगोल को नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह के दौरान भवन के अंदर सेंगोल स्थापित किया।

अलग अलग जगहों से लाया गया है सामान 

नय संसद भवन को भव्य बनाने के लिए देश के अलग अलग राज्यों से सामान लाया गया है आइये इन पर भी नजर डालते हैं नोएडा एवं राजस्थान से पत्थरों के लिए अलग अलग प्रकार की जाली लायी गई है, संसद भवन निर्माण हेतू विशेष प्रकार की फ्लाई ऐश की ईटें जो हरियाणा और उत्तरप्रदेश से लाई गई है। संसद में मौजूद कालीन उत्तरप्रदेश के मिर्जापुर से लाया गया है। संसद में खास तौर पर सागौन की लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है जो नागपुर से लाया गया है। भवन निर्माण में बलुआ पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है जो राजस्थान से मंगाया गया है। इसके अलावा भी बहुत कुछ है जो इस नए संसद भवन को अनोखा बनाती है। 

नई टेक्नोलॉजी की सिक्योरिटी 

नए संसद भवन में थर्मल इमेजिंग सिस्टम और फेस रिकग्निशन सिस्टम वाले कैमरे लगाए गए हैं जो अपडेट सीसीटीवी सिस्टम, 360 डिग्री पर काम करता है। देखा जाय तो कोई भी हैकर, यहां के उपकरणों को हैक नहीं कर सकता। नए संसद भवन को फूलप्रूफ साइबर सिस्टम से लैस किया गया है। 

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