MP News: चुनाव आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार को दिए निर्देश, तहसीलदार-टीआई से लेकर कलेक्टर-एसपी तक के होंगे तबादले

भारत निर्वाचन आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार को यह आदेश दे दिया है कि वह सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ट्रांसफर कर दे जिनके कारण से चुनाव के निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। निर्वाचन आयोग ने यह भी कहा है कि एक स्थान पर 3 वर्ष से अधिक समय होने वाले कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से हटाना होगा।

ट्रांसफर के लिए अधिकारियों की सूची तैयार

भारत निर्वाचन आयोग के आदेश की बात से मध्य प्रदेश में सभी अधिकारियों एवं कर्मचारी जिसमें शामिल हैं – मध्य प्रदेश प्रशासन विभाग, गृह विभाग मंत्रालय, पुलिस मुख्यालय, कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार, SDM, इंस्पेक्टर, पुलिस अधीक्षक आदि की ट्रांसफर सूची जारी कर दी गई है। हालांकि यह सभी ट्रांसफर 31 जनवरी 2024 के पहले होने थे परंतु ट्रांसफर की अंतिम तिथि अब आगे बढ़ा दी गई है।

राज्य शासन विभाग ने आईएएस, राज्य प्रशासनिक सेवा गृह विभाग, आईपीएस के साथ-साथ राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों की सूची तैयार कर ली है। भारत निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि तीन वर्ष से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों के तबादले किए जाएं और जितने भी कर्मचारी एवं अधिकारी मध्य प्रदेश में 3 वर्ष से अधिक एक ही स्थान पर पदस्थ हैं उन सभी का तबादला शुरू हो गया है। जिसमें शामिल हैं – कमिश्नर, कलेक्टर, पुलिस महानिरीक्षक, संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, नायब तहसीलदार, तहसीलदार पुलिस अधीक्षक, पुलिस उप अधीक्षक एवं निरीक्षक आदि।

मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने पहले से ही कलेक्टर एवं SDM के तबादले कर चुकी है लेकिन फिलहाल में पुलिस अधीक्षक एवं अन्य अधिकारियों का तबादला बाकी है हालांकि प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों द्वारा ट्रांसफर की सूची तैयार कर ली गई है। और इस अनुसार 28 जनवरी के बाद कभी भी ट्रांसफर सूची सार्वजनिक कर दी जाएगी और लगभग 15 फरवरी 2024 तक अधिकारियों का तबादला किया जा सकता है।

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CM मोहन यादव ने अधिकारियों के तबादले पर उठाया कठोर कदम

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव जी ने कर्मचारियों के तबादले से संबंधित कठोर कदम उठाए। बात ऐसी है कि मध्य प्रदेश में पिछले कई वर्षों से मंत्रियों के स्टाफ में लोग जमे हुए हैं जिसमें निजी सहायक, निजी सचिव आदि शामिल है और निर्वाचन आयोग के आदेश के पहले से ही सीएम मोहन यादव जी कर्मचारियों के तबादले शुरू कर दिए थे जिसमें कई कलेक्टर और SDM आदि शामिल है।

इसके साथ ही 15 मंत्रियों की सिफारिश तबादले को रोकने को लेकर के मुख्यमंत्री जी के सामने रखी गई। जिसका मुख्यमंत्री मोहन यादव जी ने कठोरता के साथ कदम उठाते हुए सिफारिश को रद्द कर दिया। इस तरह से मंत्रियों की सिफारिश को रद्द करना एक कठिन फैसला होता है लेकिन मुख्यमंत्री जी ने राज्य के हित में फैसला लिया।

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