MP News: मोहन यादव के कार्यकाल में कृषि का नया युग, रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन और किसानों के लिए योजनाओं की बरसात

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MP News: दिसंबर 2023 में डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद, मध्यप्रदेश की कृषि में एक नई ऊर्जा  देखी जा रही है। सरकार ने जहां किसानों की आय दोगुनी करने के लिए किसानों के हित में योजनाएं शुरू कीं, वहीं उत्पादन और तकनीक के स्तर पर भी बड़ी छलांग लगाई। गेहूं, दाल और तिलहन के रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े और सिंचाई की नई संभावनाएं प्रदेश को ‘कृषि मॉडल स्टेट’ की ओर ले जा रही हैं। आज हम यहाँ जानेंगे की कैसे किसानों को कृषि में लाभ मिल रहा है और किसान आगे बढ़ रहे हैं। 

मध्य प्रदेश में किसानों की समृद्धि का नया मॉडल

मोहन यादव सरकार ने कृषि को केवल खेतों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे उद्योग और नवाचार से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम किया है। किसानों को सीधे आर्थिक सहायता देने के लिए मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत अप्रैल 2025 में 85 लाख किसानों को ₹2000 की पहली किस्त के रूप में ₹1704 करोड़ सीधे खातों में भेजे गए। इस तरह सरकार योजनाओं के जरिए किसानों की आय बढ़ाने में जुटी हुई है। 

मध्य प्रदेश सरकार ने मात्र ₹5 में बिजली कनेक्शन देने की पहल कर सिंचाई को सरल और सस्ता बना दिया है। इससे अब तक 16,545 किसानों को पंप कनेक्शन और 4,000 ग्रामीण परिवारों को घरेलू बिजली कनेक्शन मिल चुका है।

सौर ऊर्जा की ओर बढ़ते कदमों में ‘पीएम-कुसुम योजना’ के तहत अगले 3 वर्षों में 32 लाख सोलर पंप वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिन पर किसानों को 90% सब्सिडी मिलेगी। तो इस तरह सरकार हर संभव प्रयाश कर रही है कि किसानों को खेती में आगे बढ़ाया जाये और आत्मनिर्भर बनाने के लिए सीधे कृषि यंत्र,, सिंचाई और सब्सिडी जैसे प्लान चला रही है। 

फसल उत्पादन में बढ़ोत्तरी  

2024-25 के रबी सीजन में गेहूं खरीदी 76 लाख मीट्रिक टन पार हो गई। यह पिछले 4 वर्षों की तुलना में 13 गुना अधिक है। इस उपलब्धि में 8.76 लाख किसानों की भागीदारी रही, जिन्हें ₹2,600 प्रति क्विंटल की दर से भुगतान हुआ और अब तक ₹16,472 करोड़ की राशि दी जा चुकी है।

इतना ही नहीं, सोयाबीन की सरकारी खरीद में भी 2.12 लाख किसानों से 6 लाख मीट्रिक टन उपार्जन कर ₹3043 करोड़ का भुगतान हुआ।

मोटे अनाज (श्रीअन्न) को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई ‘रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना’ के तहत किसानों को ₹3,900 प्रति हेक्टेयर की सीधी सहायता मिल रही है। यह जलवायु-लचीली खेती को नई दिशा देने वाला कदम है।

सिंचाई में आया नया विस्तार

2003 में जहां सिंचित क्षेत्र सिर्फ 3 लाख हेक्टेयर था, वहीं अब यह 50 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। 2028-29 तक सरकार इसे 1 करोड़ हेक्टेयर तक पहुंचाने के लिए ₹13,596 करोड़ का निवेश कर रही है। इसके साथ जल संरक्षण जैसे कार्यक्रम भी चला रही है जिससे आने वाले समय को भी दूरदृष्टि के साथ देखा जा रहा है। 

इस विकास से कई क्षेत्रों में किसान अब साल में तीन फसलें लेने लगे हैं। बूंद-बूंद सिंचाई, नई नहरें और जलसंचयन संरचनाएं प्रदेश के दूरदराज़ इलाकों में भी फसल लहराने की उम्मीद जगा रही हैं।

केन-बेतवा लिंक योजना

सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना केन-बेतवा लिंक योजना है, जिससे 10 जिलों के 44 लाख किसान परिवारों को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इस प्रोजेक्ट में बिजली की आवश्यकता नहीं होगी क्योंकि दबावयुक्त पाइप सिंचाई प्रणाली अपनाई जा रही है।

इसके अलावा, पार्वती-कालिसिंध-चंबल लिंक परियोजना के लिए मध्यप्रदेश, राजस्थान और केंद्र सरकार ने त्रिपक्षीय समझौता किया है। इन दोनों योजनाओं में कुल ₹75,000 करोड़ का निवेश होगा और यह बुंदेलखंड जैसे जलसंकटग्रस्त क्षेत्रों में भी खेती को स्थायी बनाएगा।

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मोहन यादव सरकार की यह कृषि नीति सिर्फ योजनाओं का जमावड़ा नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर किसानों के जीवन में बदलाव लाने वाली पहल है। परंपरागत खेती से आगे बढ़कर जब राज्य सौर ऊर्जा, श्रीअन्न और वैल्यू एडिशन आधारित कृषि की ओर बढ़ता है, तो यह सिर्फ उत्पादन नहीं, बल्कि सम्मानजनक कृषि का युग बनता है।

किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह बदलाव प्रेरणादायक है और अगर इसी गति से सुधार जारी रहे, तो मध्यप्रदेश जल्द ही देश के सबसे उन्नत कृषि राज्यों की सूची में सबसे आगे खड़ा होगा।

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क्या मोहन यादव सरकार की यह कृषि क्रांति वाकई किसानों की ज़िंदगी बदल रही है? क्या ये योजनाएं आपके क्षेत्र तक पहुँची हैं? नीचे कमेंट करें और हमें बताएं। और इस तरह की कहती, किसानों, मध्य प्रदेश और सरकारी योजनाओं की ख़बरों के लिए यापन अकाल के साथ जुड़े रहे।

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