MP New District Bareilly: रायसेन से अलग होकर नया जिला बनेगा बरेली? नगर परिषद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव किया पारित

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रायसेन जिले के बरेली शहर के लिए 31 दिसंबर 2025 का दिन ऐतिहासिक रहा। बरेली नगर परिषद की साधारण सभा की बैठक में बरेली को जिला बनाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया है। करीब दो दशकों से चली आ रही इस मांग को अब प्रशासनिक और राजनीतिक बल मिल रहा है। इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद अब इसे राज्य सरकार और ‘प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग’ को भेजा जाएगा। बरेली को जिला बनाने की मांग केवल प्रशासनिक सुविधा नहीं, बल्कि इस क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा हाल ही में प्रशासनिक सीमाओं के पुनर्निर्धारण के संकेतों ने बरेली के लोगों की उम्मीदों को पंख लगा दिए हैं।

नगर परिषद की बैठक: प्रस्ताव में क्या है खास?

नगर परिषद बरेली की साधारण सभा की बैठक में अध्यक्ष और पार्षदों ने मिलकर 19 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा की, जिसमें सबसे प्रमुख बरेली को जिला बनाना था।

  • एकजुटता: पक्ष और विपक्ष दोनों ने विकास के मुद्दे पर मतभेद भुलाकर बरेली के हक में आवाज उठाई।

  • तर्क: प्रस्ताव में तर्क दिया गया कि बरेली की जनसंख्या और क्षेत्रफल अब इतना बड़ा हो चुका है कि इसे जिला मुख्यालय (रायसेन) से संचालित करने में काफी समय और संसाधन खर्च होते हैं।

  • नगर गौरव दिवस: बैठक में गणतंत्र दिवस और नगर गौरव दिवस को भी धूमधाम से मनाने का निर्णय लिया गया, जो बरेली की नई पहचान को रेखांकित करेगा।

बरेली को जिला बनाने की मांग क्यों? (Background Info)

बरेली तहसील रायसेन जिले का एक संपन्न और व्यापारिक केंद्र है। इसे जिला बनाने की मांग के पीछे कई ठोस कारण हैं:

  1. भौगोलिक दूरी: रायसेन जिला मुख्यालय से बरेली की दूरी काफी अधिक है। आम जनता को छोटे-छोटे प्रशासनिक कार्यों के लिए 100 किलोमीटर से अधिक का सफर करना पड़ता है।

  2. प्रशासनिक बोझ: बरेली और उदयपुरा जैसे क्षेत्रों का कार्यभार बढ़ने से प्रशासन को प्रबंधन में कठिनाई होती है। अलग जिला बनने से यहां कलेक्टर और एसपी कार्यालय होंगे, जिससे कानून-व्यवस्था बेहतर होगी।

  3. विकास की संभावना: जिला बनने से बजट का सीधा आवंटन होगा, जिससे स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़कों का जाल बिछेगा।

आम आदमी और क्षेत्रीय विकास पर क्या असर होगा?

एक नए जिले के निर्माण का अर्थ केवल फाइलों का बंटवारा नहीं, बल्कि आम आदमी के जीवन में सीधा बदलाव है।

  • शिक्षा का विस्तार: नया जिला बनने पर यहाँ पीजी कॉलेज, सरकारी अस्पताल का अपग्रेडेशन और अन्य विभागीय मुख्यालय खुलेंगे।

  • रोजगार: प्रशासनिक दफ्तर खुलने से शहर में नई नौकरियों के अवसर पैदा होंगे और स्थानीय बाजार (Real Estate & Retail) को मजबूती मिलेगी।

  • किसानों को लाभ: बरेली एक कृषि प्रधान क्षेत्र है। जिला बनने से मंडी सुविधाओं और कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ किसानों को सीधे तौर पर मिल सकेगा।

विशेषज्ञों की राय: “मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में पुनर्गठन आयोग बनाया है जो दिसंबर 2025-जनवरी 2026 में अपनी रिपोर्ट सौंप सकता है। क्षेत्रीय विधायक के कैबिनेट में मजबूत स्थिति और नगर परिषद के इस प्रस्ताव के बाद बरेली का पलड़ा भारी नजर आ रहा है।”

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. क्या बरेली को आधिकारिक तौर पर जिला घोषित कर दिया गया है? उत्तर: नहीं, अभी नगर परिषद ने जिला बनाने का प्रस्ताव पारित कर सरकार को भेजा है। अंतिम फैसला राज्य सरकार और पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट के बाद लिया जाएगा।

Q2. बरेली को जिला बनाने की मांग कितनी पुरानी है? उत्तर: यह मांग पिछले 20-25 वर्षों से लगातार उठाई जा रही है। स्थानीय जन आंदोलनों और राजनीतिक मंचों पर यह प्रमुख मुद्दा रहा है।

Q3. नया जिला बनने की प्रक्रिया क्या होती है? उत्तर: स्थानीय निकायों या जनप्रतिनिधियों के प्रस्ताव के बाद, राजस्व विभाग और पुनर्गठन आयोग इसका सर्वे करता है। इसके बाद कैबिनेट की मंजूरी और गजट नोटिफिकेशन के जरिए नया जिला अस्तित्व में आता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

बरेली नगर परिषद का यह प्रस्ताव क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य की ओर एक साहसी कदम है। हालांकि जिला बनने की राह में अभी कई प्रशासनिक प्रक्रियाएं बाकी हैं, लेकिन स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों की यह एकजुटता बताती है कि अब बरेली को और अधिक समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार करती है, तो यह रायसेन ही नहीं बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के नक्शे पर एक नए औद्योगिक और प्रशासनिक केंद्र के रूप में उभरेगा।

Author

  • Uma Hardiya

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