लाड़ली बहना योजना के कारण भारी नुकसान, खामियाजा भुगत रहे कर्मचारी, अगले महीने वेतन मिलना मुश्किल

प्रदेश में लाडली बहना योजना के ऊपर खर्च होने वाले पैसे का खामियाजा अब 400 निकायों के कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। दरअसल चुंगी क्षतिपूर्ति के पैसों से राज्य के 16 नगर निगम और 400 निकायों की गाड़ी चलती थी, उन पर मध्य प्रदेश की पूर्व शिवराज सरकार और वर्तमान मोहन यादव सरकार ने पिछले 7 महीना से 463 करोड रुपए की कटौती कर दी है।  

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश राज्य सरकार ने नए साल 2024 की शुरुआत में ही चुंगी क्षतिपूर्ति के 300 करोड रुपए में से 74 करोड रुपए काट दिए हैं। निकाय कर्मचारियों का कहना है की क्षतिपूर्ति का काटा हुआ यह पैसा सरकार ने अपने पास रखा है निकायों के बिजली के बिल भुगतान के नाम पर। मोहन यादव सरकार द्वारा निकायों के क्षतिपूर्ति के इन पैसों की कटौती से निकायों की माली हालत बहुत खराब हो गई है। 

30 करोड़ से लेकर 100 करोड़ के बीच हुई कटौती 

राज्य के तकरीबन 400 निकायों से मिली जानकारी के मुताबिक बीते 7 महीने से राज्य सरकार द्वारा चल रही कटौती 30 करोड रुपए से लेकर 100 करोड रुपए के बीच है। इस कटौती से निकायों की माली हालत बहुत खराब हो गई है, निकायों की हालत यह हो गई है कि निकायों के कर्मचारियों को वेतन मिलेगा भी या नहीं इसका पता पूरे महीने के आखीर में चलता है। 

लाडली बहना के खर्च से वेतन अटके 

प्रदेश की लाडली बहना योजना जिसके चलते राज्य सरकार की तरफ से हर महीने लगभग 1600 करोड रुपए राजकीय खजाने से निकाले जाते है, जिस वजह से अब वित्त विभाग ने ट्रेजरी पर सख़्ती कर दी है। वित्त विभाग की इस सख़्ती के कारण निकाय अब बिना वित्त विभाग की मंजूरी के दूसरी योजना के संचालन के लिए पैसा नहीं निकाल सकते। यही वजह है की निकायों की माली हालत बहुत खराब हो रही है, और यह भी पहले कहना मुश्किल हो रहा है कि कर्मचारियों की वेतन मिलेगी या नहीं। इसके लिए माह के अंत तक गणना का इंतजार करना पड़ रहा है। 

हालात का पता, वित्त विभाग से बात कर रहे 

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने मामले की जानकारी देते हुए कहा कि “निकायों की वित्तीय स्थिति की जानकारी है, लगातार वित्त विभाग से बात कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि निकायों को दिक्कत नहीं होगी। दूसरी तरफ निगमों को आत्मनिर्भर बनाने पर भी काम किया जा रहा है।

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  • Srajan Thakur

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