चूल्हा बंद हड़ताल: सरकार के ऊपर फिर आई मुसीबत, स्व-सहायता समूह एवं रसोइया बहनों ने उठाई मांग

चूल्हा बंद हड़ताल: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार के ऊपर फिर से एक और बड़ी मुसीबत आन पड़ी है। राज्य सरकार पहले से ही लाडली बहना योजना के चलते दिन प्रतिदिन कर्ज़ तले डूबती चली जा रही थी और अब प्रदेश की स्व-सहायता समूह एवं रसोइया बहनों ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नाम पर जिला कलेक्टर एवं एसडीएम द्वारा ज्ञापन सौंपा है, जिसमें स्व सहायता समूह एवं महिला रसोइया बहनों ने समस्याओं और अपनी कुल 8 मांगों को पूरा करवाने को लेकर प्रदेश में 5 फरवरी से चूल्हा बंद अनिश्चितकालीन हड़ताल करने का निर्णय लिया है। 

प्रदेश के महिला स्व सहायता समूह एवं रसोइया बहनों ने राज्य की मोहन यादव सरकार से अपनी 8 मांगों को पूरा कराने के संदर्भ में 1 फरवरी 2024 को ज्ञापन सौंपा था जिसके अनुसार महिलाएं समस्या मांगों को लेकर प्रांतीय महिला स्व सहायता समूह महासंघ मध्य प्रदेश के बैनर तले अवगत कराया जाता है, जिस कारण निर्धारित सहायता समूह एवं रसोइया बहने लगातार शोषण का शिकार बनती चली जा रही है।

महिलाओं का आरोप है कि उनकी इस समस्या के प्रति सरकार बिल्कुल भी ध्यान आकर्षित नहीं कर रही है। इसी समस्या के चलते महिला स्व सहायता समूह एवं रसोइया बहनों ने प्रदेश सरकार से अपनी मांगों को पूरा करने के प्रति 5 फरवरी से चूल्हा बंद अनिश्चितकालीन हड़ताल करने का निर्णय लिया है। 

चूल्हा बंद अनिश्चितकालीन हड़ताल आरंभ 

मध्य प्रदेश की महिला स्व सहायता समूह एवं रसोइया बहनों ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नाम पर ज्ञापन सौंपा है जिसमें महिला स्व सहायता समूह एवं रसोइया बहनों ने प्रदेश सरकार को अपनी मांगों से अवगत कराने और अपनी समस्याओं के प्रति कोई ठोस कदम उठाने का हवाला दिया है।

महिलाओं ने अपनी इन्हीं सभी मांगों को पूरा कराने के लिए महिला स्व सहायता समूह एवं रसोइया बहनों ने आज 5 फरवरी से चूल्हा बंद अनिश्चितकालीन हड़ताल को आरंभ करने का फैसला लिया है। महिलाओं का कहना है कि यदि सरकार उनकी इन समस्या मांगों को जल्दी पूरा नहीं करती है तो यह हड़ताल और विकराल रूप धारण कर लेगी। 

महिला स्व सहायता समूह एवं रसोइया बहनों की प्रदेश सरकार से मांगे  

1 – महिलाओं का कहना है कि उन्हें 1 से 4 माह बीत जाने के बाद राशि उपलब्ध कराई जाती है, जिस वजह से कई समूह संचालकों को मजबूरन भोजन बनाने के लिए कर्ज लेना पड़ता है। महिला स्व सहायता समूह एवं रसोइया बहनों की मांग है कि उन्हें वर्ष 2018 के अनुसार एडवांस राशि या फिर किसी एक निश्चित दिनांक पर राशि उपलब्ध कराई जाए। 

2 – प्रदेश में एक शाला एक परिवार के तहत हजारों की संख्या में स्व सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को हटाया गया था जो सिर्फ एक निर्देश पर संभव हुआ था। प्रदेश की हजारों महिलाएं एक आदेश के बाद बेरोजगार हो गई थी। महिला एवं स्वास्थ्य सहायता समूह की मांग है कि उन्हें यथावत किया जाए। 

3 – केंद्र सरकार के नियम के मुताबिक स्व सहायता समूह को 60% केंद्र और 40% राज्य को मिलाकर कुल 100% राशि मिलनी चाहिए थी, लेकिन विगत वर्षों से स्व सहायता समूह को सिर्फ 60% राशि ही उपलब्ध कराई जा रही है जिस कारण समूह को मेनू अनुसार भोजन देने में कर्जदार बनना पड़ रहा है। स्व सहायता समूह की मांग है कि उन्हें 100% राशि आवंटित की जाए। 

4 – महिलाओं की मांग है की वर्तमान में प्राथमिक शाला में प्रति छात्र भोजन पकाने की लागत 5.45 पैसे है जिसको बढ़ती महंगाई को मध्य नजर रखते हुए ₹10 किया जाए एवं खादन्न को 100 ग्राम से बढ़ाकर 200 ग्राम किया जाए, साथ ही माध्यमिक शाला में प्रति छात्र भोजन दर 8.17 पैसे से बढ़ाकर ₹15 और खादन्न 250 ग्राम से 300 ग्राम किया जाए। 

5 – महिला स्व सहायता समूह की मांग है कि पहले की तरह पत्रक के द्वारा खादन्न प्राप्त होता था उसको लागू किया जाए ताकि खादन्न प्राप्त होने की स्थिति में जो POS मशीन में फिंगर ना लगना और POS मशीन का असमय बंद होने जैसी समस्याओं का सामना उन्हें न करना पड़े।

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6 – महिला स्व सहायता समूह एवं रसोइया बहनों की मांग है कि उन्हें वर्ष 2018 के अनुसार महीने के पहले हफ्ते में राशि आवंटित की जाए ताकि वर्तमान में महिला बाल विकास विभाग के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों एवं शालाओं में संचालित रसोइया बहनों को खादन्न एवं राशि तीन-चार महीने में आवंटित की जाती है जिससे भोजन का संचालन बाधित होता है। 

7 – आंगनबाड़ी केंद्र में कार्यरत रसोइया बहनों को ₹500 प्रति माह वेतन स्व सहायता समूह की कटौती के साथ प्रदान किया जाता है। महिलाओं की मांग है कि उन्हें अलग से राशि प्रदान की जाए और उसे वर्तमान ₹500 से बढ़ाकर ₹2000 किया जाए। 

8 – पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अगस्त 2023 में आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्यरत रसोइया बहनों से यह वादा किया था कि उनको प्राप्त होने वाली राशि को ₹500 से बढ़ाकर ₹1000 किया जाए। हालांकि अभी तक इस वादे को पूरा नहीं किया गया। महिलाओं की मांग है कि पूर्व सीएम शिवराज का मान रखते हुए इस वचन को जल्दी पूरा किया जाए। 

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  • Srajan Thakur

    मेरा नाम सृजन है और मुझे लिखना काफी पसंद है। मैं एक जिज्ञासु वक्तितित्व का हूँ इसलिए मैं सम्पूर्ण विषयों के ऊपर लेख लिखने में सक्षम हूँ। में एक पूर्ण रूप से लेखक कहलाता हूँ।

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