MP News: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तोड़ी परंपरा, मध्यप्रदेश के इतिहास में सबसे बड़ा बदलाव  

जैसा कि हम सब जानते हैं मध्य प्रदेश राज्य के मुख्यमंत्री का आवास यानी कि सीएम हाउस हमेशा से राजधानी भोपाल में रहा है, पर अब इस परंपरा में बदलाव होने वाला है और मध्य प्रदेश के इतिहास में अब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव एक नया पन्ना जोड़ने वाले हैं। जी हां अब सिर्फ राजधानी भोपाल में ही नहीं बल्कि उज्जैन में भी बनेगा मुख्यमंत्री निवास। बता दें कि उज्जैन के कुलपति के बंगले को सीएम हाउस बनाने की तैयारियां जोरों शोरों से चल रही है। 

उज्जैन में मध्य प्रदेश के नवनियुक्त मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का पुराना ठिकाना रहा है, CM बनने के बाद उनको अपना स्थाई निवास छोड़कर भोपाल में शिफ्ट होना पड़ा लेकिन अब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव अब तक के पहले ऐसे मुख्यमंत्री होंगे जिनके भोपाल और उज्जैन दोनों ही जिलों में अपने बंगले होंगे। महाकाल नगरी उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार पांडे का बंगला खाली हो चुका है, जिस पर अब रंगाई पुताई जारी है और कर्मचारी उसको तेज़ी से सजाने संवारने में लगे हुए हैं। 

पहली बार होंगे CM के दो निवास 

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव इतिहास बदलने वाले हैं जैसा कि आपको भी यह जानकारी होगी कि मध्य प्रदेश के सभी मुख्यमंत्रियों का निवास हमेशा से राजधानी भोपाल में श्यामला हिल्स पर रहा है और भोपाल से बाहर नियमों के विरुद्ध जाकर अपनी मर्जी के अनुसार सीएम निवास बनाने का कार्य अब तक किसी भी मुख्यमंत्री ने नहीं किया, पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ऐसा करने जा रहे हैं। CM डॉ मोहन यादव को उज्जैन के कुलपति का बंगला दूसरे सीएम हाउस के रूप में मिला है, वह अब भोपाल और उज्जैन दोनों ही बगलों में रहेंगे। 

3 फरवरी को होंगे CM यादव शिफ्ट 

महाकाल की नगरी उज्जैन के कुलपति के बंगले को रंगाई-पुताई और साज-सजावट के साथ CM हाउस के रूप में तैयार किया गया है। CM मोहन यादव के इस नए बंगले में कुल 8 कमरे, 1 बैठक कक्ष, 1 हाल, 1 बड़ा लोन, 1 किचन और डाइनिंग हाल है, साथ ही इस बंगले के अगले और पिछले हिस्से में गार्डन और पार्किंग एरिया है। सूत्रों से मिली सूचना के मुताबिक 3 फरवरी को शुभ मुहूर्त पर पूजा अर्चना के बाद CM डॉ मोहन यादव यहां पर शिफ्ट हो जाएंगे।

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CM यादव ने तोड़ी परंपरा  

उज्जैन हमेशा से महाकाल की नगरी रहा है, जहां राजा बाबा महाकाल है। वहीं सदियों से इस नगरी पर महाकाल का राज रहा है और आगे भी रहेगा। ऐसा माना जाता है कि किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री यहां उज्जैन में रात नहीं गुजरता, क्योंकि यह मिथक है कि एक नगरी में दो राजा राज नहीं करते, इसलिए मोहन यादव में इस परंपरा को सदा के लिए समाप्त कर दिया है, साथ ही उन्होंने इसके पीछे यह तर्क दिया है कि, “मैं उज्जैन से हूं और महाकाल का बेटा हू, हम तो बैठे हैं, राजा तो महाकाल ह, इसलिए मैं रह सकता हूं क्योंकि हम कोई राजा नहीं है बल्कि महाकाल की सेवक हैं”।

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  • Srajan Thakur

    मेरा नाम सृजन है और मुझे लिखना काफी पसंद है। मैं एक जिज्ञासु वक्तितित्व का हूँ इसलिए मैं सम्पूर्ण विषयों के ऊपर लेख लिखने में सक्षम हूँ। में एक पूर्ण रूप से लेखक कहलाता हूँ।

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