चंद्रयान-3 का काउंटडाउन शुरू, 2 बजकर 35 मिनट में चांद की उड़ान के लिए तैयार

भारत की एक और उम्मीद चंद्रयान-3  कुछ ही देर में अब कुछ ही देर बाद बड़े लक्ष्यों को लेकर चंद्रमा की तरफ रवाना होने वाला है। चंद्रयान की यह यात्रा लंबी लेकिन महत्वपूर्ण है। इसकी सफलता से इसरो के भविष्य की तैयारियों एवं मिशन का एक बड़ा आधार बनेगी। भारत के इस मिशन पर दुनिया की नजरें लगी हैं क्योंकि भारत इस यान को चंद्रमा के साउथ पोल पर लैंड कराने की तैयारी की है और यही बात इस मिशन को और खास बना रही है। इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन के अंतरिक्ष यान चंद्रमा के नॉर्थ पोल पर उतरे हैं।

चंद्रयान के तीन हिस्से 

चंद्रयान-3  को तीन अलग-अलग हिस्सों में बनाया गया है पहला हिस्सा ऑर्बिटर है जो चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग से पहले चंद्रमा का चक्कर लगाएगा। दूसरा हिस्सा लैंडर विक्रम है जो सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा और तीसरा हिस्सा रोवर प्रज्ञान है जो सॉफ्ट लैंडिंग के बाद सतह की जांच करेगा।

चंद्रयान 2 की हुई थी लैंडिग क्रैश 

पिछली बार 22 जुलाई को चंद्रयान 2 की सॉफ्ट लैंडिंग करते समय उसका इसरो से कम्यूनिकेशन टूट गया और 6-7 सितंबर को विक्रम लैंडर की क्रैश लैंडिंग हो गई थी। इसरो ने अपनी पिछली गलतियों को सुधारते हुए इस बार पूरी पुख्ता तैयारी के साथ चंद्रयान-3 की तैयारी की है।

चांद पहुंचने में कितना समय लगेगा 

धरती से चांद की दूरी करीब 4 लाख किलोमीटर है। इस दूरी को तय करने में चंद्रयान-3 को करीब 40 से 48 दिनों का समय लगेगा।

चंद्रयान-3 का मकसद क्या है? 

ISRO वैज्ञानिक दुनिया को बताना चाहते हैं कि भारत दूसरे ग्रह पर सॉफ्ट लैंडिंग करा सकता है। वहां अपना रोवर चला सकता है सबसे जरुरी बात चाँद की सतह, वायुमंडल और जमीन के भीतर होने वाली हलचलों का पता करना है। 

चांद का एक दिन धरती के 14 दिन के बराबर होता है। इन 14 दिनों में रोवर चंद्रमा की सतह का चक्कर लगाते हुए वैज्ञानिक परीक्षण करेगा। रोवर में लगे कैमरे चांद की सतह की तस्वीरें और डाटा भेजेंगे। भेजे जाने वाले डाटा चंद्रमा के बारे में नई चीजों एवं रहस्यों से परदा उठ सकता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि चांद की सतह के नीचे कई बहुमूल्य सोना, प्लेटिनम और यूरेनियम जैसी धातुएं हो सकती हैं।

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नोट करने वाली बातें – 

चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग के लिए इसरो LVM-3 लॉन्चर यानी रॉकेट का इस्तेमाल कर रहा है। 

चांद का एक दिन धरती के 14 दिन के बराबर होता है।

चंद्रयान-3 के लैंडर-रोवर 45 से 50 दिन के अंदर जब सॉफ्ट लैंडिंग करेंगे। 

दुनिया के चार देश चांद पर चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास कर चुके है। और कुल 38 बार सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास किया गया है।  लेकिन सारे सफल नहीं हुए। 

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