घरेलू गैस सिलेंडर और मुफ्त राशन पर केंद्र सरकार करने वाली है बड़ी घोषणा

केंद्र सरकार रसोई गैस और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के लिए दी जाने वाली सब्सिडी स्कीम के जरिए अपने खर्चों को नियंत्रण करना चाहती है, अनुमानित तौर पर बता दें कि प्रतिवर्ष इन योजनाओं के कारण सरकारी खजाने पर 400000 करोड़ रुपए का खर्च होता है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम भारत में इसका उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को सस्ता और अच्छा राशन पहुंचाना है, इसके माध्यम से सरकार गरीब वर्ग के लोगों को सस्ता अनाज, तेल और अन्य खाद्य पदार्थ प्रदान करती है।

राशनकार्ड धारकों को मिल रहा है सस्ता राशन

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के द्वारा अलग-अलग राज्यों में जितने भी राशन कार्ड धारक हैं, अपने निकटवर्ती राशन की दुकानों पर सस्ती कीमतों में खाद्य पदार्थ खरीदारी के हकदार हैं, जिसके कारण गरीब वर्ग के लोग अपने मूलभूत आवश्यकता के लिए सस्ता राशन और अन्य खाद्य सामग्री को प्राप्त कर सकते हैं।

भारत देश संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है जो ऊर्जा उपभोक्ता है, बता दें कि भारत में एलपीजी गैस की मांग काफी मात्रा में बढ़ गई है, एलपीजी का खर्च 1.13% है, वही पेट्रोल उत्पादों की खपत 12.3% तक पहुंच गई है, इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि एलपीजी का उपयोग दिनों दिन बढ़ता जा रहा है।

भारत देश में गरीबी और भुखमरी काफी मात्रा में देखने को मिलती है, सरकार ने इसका समाधान करने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के द्वारा नामित जरूरतमंद और गरीब परिवार के लोगों को सस्ता और पौष्टिक भोजन पदार्थ उपलब्ध कराया है, लेकिन इस बात की कोई ठोस जानकारी प्राप्त नहीं है, कि क्या इस योजना के द्वारा उन जरूरतमंद लोगों तक यह सस्ता और पौष्टिक भोजन पदार्थ जा रहा है या नहीं, या उन्हें उसका लाभ मिल रहा है, तो इसकी जांच होनी जरूरी है।

यह भी पढ़ें – लाड़ली बहनों को आवास योजना और गैस सिलेंडर के बाद अब मिलने वाला है एक और बड़ा तोहफा

और भी सस्ता होगा एलपीजी सिलेंडर

भोजन और खाद्य पदार्थों के अलावा एलपीजी सब्सिडी का मूल्यांकन भी बहुत जरूरी है, क्योंकि हमें यह जानना बहुत जरूरी है, कि इतनी आबादी के किस वर्ग को सब्सिडी मिल रही है और किसको नहीं, टीपीडीएस के तहत खाद्य सब्सिडी की लागत बढ़ रही है, 2021 में संशोधित अनुमान 4,22,618.11 करोड़ रुपये है। वहीं, एमडीएम और आईसीडीएस को लागू करने की लागत 12,900 करोड़ रुपये और 17,252.21 करोड़ रुपये थी।

एलपीजी गैस और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम दोनों ही अब तक की केंद्र सरकार की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक हैं, इस काम की जिम्मेदारी नीति आयोग को सौंपी गई है। चार लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी योजनाओं पर खर्च का मूल्यांकन किया जा सकता है, इन योजनाओं का किसी भी प्रकार से दुरुपयोग को रोका जा सकता है, और जरूरतमंद लोगों तक इसका लाभ मिल रहा है या नहीं इसकी जांच आवश्यक है।

यह भी पढ़ें – सरकारी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, नवरात्रि से पहले मिलेगा धमाकेदार तोहफा वेतन में ₹20000 तक की बढ़ोतरी

Author

Leave a Comment

Your Website