मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से, विशेषकर मालवा अंचल के लिए रेल कनेक्टिविटी का एक नया अध्याय शुरू होने वाला है। इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के अंतर्गत इंदौर से धार के बीच रेल लाइन बिछाने का काम अब अपने अंतिम चरण (Final Stage) में पहुंच गया है। वर्षों से लंबित इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी बाधा ‘टनल’ (सुरंग) और ऊंचे पुलों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। पश्चिम रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, धार तक पटरी बिछाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है, जिससे उम्मीद जगी है कि 2025-26 के अंत तक इस रूट पर पहली ट्रेन का ट्रायल देखा जा सकेगा। यह रेल लाइन न केवल धार और झाबुआ जैसे आदिवासी बहुल जिलों को देश के मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ेगी, बल्कि इंदौर से गुजरात की दूरी को भी काफी कम कर देगी।
प्रोजेक्ट की ताजा स्थिति: क्या-क्या काम हो चुका है?
इंदौर-दाहोद रेल लाइन (लगभग 200 किमी) का काम कई फेज में चल रहा है। ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार:
इंदौर से धार सेक्शन: इस सेक्शन पर मिट्टी फिलिंग और पुलिया निर्माण का काम 90% से ज्यादा पूरा हो चुका है। राऊ से टीही तक का काम पहले ही पूरा हो चुका था, अब मुख्य फोकस टीही से धार के बीच है।
सुरंगों का निर्माण: पीथमपुर के पास बन रही टनल इस प्रोजेक्ट का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा थी, जिसका काम अब फिनिशिंग स्टेज पर है।
स्टेशन बिल्डिंग: धार रेलवे स्टेशन की मुख्य बिल्डिंग और प्लेटफार्म का ढांचा तैयार हो गया है। सिग्नलिंग और इलेक्ट्रिफिकेशन का काम भी समानांतर रूप से शुरू कर दिया गया है।
मालवा और व्यापार को कैसे मिलेगा ‘बूस्टर डोज़’?
यह रेल लाइन केवल यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए ‘लाइफलाइन’ साबित होगी।
पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र को लाभ: देश के सबसे बड़े औद्योगिक केंद्रों में से एक, पीथमपुर (Auto Hub) अब सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा। इससे कच्चा माल मंगवाना और तैयार वाहनों को बंदरगाहों (Ports) तक भेजना सस्ता और आसान होगा।
धार-झाबुआ का विकास: रेल सुविधा आने से धार और झाबुआ के पिछड़े इलाकों में नए उद्योग लगेंगे और स्थानीय लोगों को रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।
गुजरात से सीधी कनेक्टिविटी: दाहोद तक लाइन जुड़ने के बाद, इंदौर से अहमदाबाद और मुंबई जाने का एक वैकल्पिक और छोटा रास्ता खुल जाएगा।
आम आदमी के लिए क्या बदलेगा? (Expert Opinion)
विशेषज्ञों का मानना है कि इस रेल लाइन के शुरू होने से सड़क मार्ग पर दबाव कम होगा। वर्तमान में इंदौर से धार जाने के लिए केवल बस या निजी वाहन ही विकल्प हैं।
‘अपना कल’ का विश्लेषण:
“रेलवे कनेक्टिविटी मिलने से धार एक ‘सैटेलाइट टाउन’ के रूप में विकसित होगा। लोग धार में रहकर इंदौर में नौकरी कर सकेंगे, क्योंकि ट्रेन का सफर बस की तुलना में काफी सस्ता और आरामदायक होगा। इसके अलावा, मांडू (Mandu) जैसे पर्यटन स्थलों पर जाने वाले पर्यटकों की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी होगी, जिससे लोकल टूरिज्म चमकेगा।”
इंदौर-दाहोद रेल प्रोजेक्ट: एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
| कुल लंबाई | लगभग 200 किलोमीटर |
| प्रमुख स्टेशन | इंदौर, टीही, धार, सरदारपुर, झाबुआ, दाहोद |
| मुख्य बाधा | पीथमपुर के पास की पहाड़ी सुरंग (Tunnel) |
| अनुमानित लाभ | औद्योगिक विकास और गुजरात-MP के बीच कम दूरी |
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. इंदौर-धार रेल लाइन पर पहली ट्रेन कब चलेगी?
उत्तर: रेलवे के वर्तमान लक्ष्य के अनुसार, 2025 के अंत तक या 2026 की शुरुआत में इस सेक्शन पर ट्रायल रन शुरू होने की पूरी संभावना है।
Q2. इस रेल लाइन से कौन-कौन से शहर जुड़ेंगे?
उत्तर: यह लाइन इंदौर से शुरू होकर पीथमपुर (टीही), धार, सरदारपुर, झाबुआ होते हुए गुजरात के दाहोद स्टेशन पर जाकर मिलेगी।
Q3. क्या धार रेलवे स्टेशन का काम पूरा हो गया है?
उत्तर: धार स्टेशन का सिविल निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। स्टेशन की बिल्डिंग और पटरियों के बिछाने का काम तेजी से चल रहा है।
निष्कर्ष (Conclusion)
इंदौर-दाहोद रेल परियोजना का पूरा होना मालवा की दशकों पुरानी मांग का पूरा होना है। यह केवल पटरियों का बिछना नहीं है, बल्कि धार और झाबुआ जैसे जिलों की किस्मत बदलने वाला प्रोजेक्ट है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और रेल मंत्रालय की सक्रियता से अब वह दिन दूर नहीं जब धार स्टेशन पर ट्रेन की सीटी सुनाई देगी।
नोट: यह खबर Patrika और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। प्रोजेक्ट की डेडलाइन में तकनीकी कारणों से बदलाव संभव है।










