MP संविदा कर्मियों को नहीं भाया वेतन इंक्रीमेंट, बोले ऊंट के मुंह में जीरा है ये बढ़ोतरी

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MP News: लंबे इंतजार के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने संविदा कर्मचारियों की वेतन वृद्धि का आदेश जारी तो कर दिया, लेकिन इस आदेश से खुश होने की बजाय हजारों कर्मचारी अब सवाल उठा रहे हैं। क्या ये इंक्रीमेंट वाकई उनके लिए मायने रखता है, या ये सिर्फ औपचारिकता भर है?

CPI इंडेक्स के तहत हुआ 2.94% इंक्रीमेंट

गुरुवार को राज्य सरकार के वित्त विभाग ने संविदा कर्मचारियों के लिए 2.94% की वेतन वृद्धि का नोटिफिकेशन जारी किया। यह बढ़ोतरी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर तय की गई है। लेकिन संविदा कर्मियों का कहना है कि इस फैसले से उन्हें कोई वास्तविक राहत नहीं मिली। इस वृद्धि से वेतन में केवल ₹375 से ₹2500 तक का फर्क पड़ा है, जो महंगाई के मुकाबले बेहद मामूली है।

मध्यप्रदेश संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने इसे “ऊंट के मुंह में जीरा” बताया है।
उनका कहना है कि “हमने दो बार वल्लभ भवन जाकर ज्ञापन सौंपा। बार-बार यही मांग की कि हमें नियमित कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ता (DA) दिया जाए। लेकिन सरकार ने CPI इंडेक्स का हवाला देकर नाममात्र की वृद्धि कर दी। उनका कहना है कि ये आंकड़े आम आदमी की ज़मीनी जरूरतों से बिल्कुल मेल नहीं खाते।

महंगाई की रफ्तार और सरकार का आंकड़ा

महासंघ का दावा है कि जब रोज़मर्रा की चीज़ों की कीमतें तेज़ी से बढ़ रही हैं, तो महज 2.94% की बढ़ोतरी से क्या फर्क पड़ेगा? “सरकार जिस उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों को मानकर वेतन तय करती है, वो रियलिटी से काफी दूर होते हैं,” — राठौर ने कहा।

उनका तर्क है कि अगर नियमित कर्मचारियों की तरह DA बढ़ाया जाए, तो संविदा कर्मचारियों को भी ₹2,000 से ₹6,000 तक फायदा मिल सकता है।

कर्मचारी मांग रहे हैं “बराबरी का अधिकार”

संविदा कर्मचारियों की सबसे बड़ी शिकायत यही है कि उन्हें अब तक बराबरी का दर्जा नहीं मिला। जब काम बराबर है, जिम्मेदारियां बराबर हैं — तो वेतन और लाभों में भेदभाव क्यों? कर्मचारियों महासंघ के अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि “हम सिर्फ इंसाफ चाहते हैं। जो अधिकार नियमित कर्मचारियों को मिलते हैं, वही हमें भी दिए जाएं।”

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क्या सरकार फिर बदलेगी अपना फैसला?

संविदा कर्मचारी संगठनों ने संकेत दिए हैं कि अगर उनकी मांगों पर फिर से विचार नहीं किया गया, तो वे आंदोलन या प्रदर्शन का रास्ता भी अपना सकते हैं।

सवाल ये है की क्या सरकार संविदा कर्मचारियों की इस नाराजगी को गंभीरता से लेगी? या फिर ये मामूली इंक्रीमेंट ही उनकी आखिरी उम्मीद बनकर रह जाएगा?

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क्या संविदा कर्मियों को भी DA जैसे लाभ मिलने चाहिए? क्या 2.94% की वेतनवृद्धि आज की महंगाई के दौर में वाकई कोई मायने रखती है? नीचे कमेंट करें और बताएं आपकी राय क्या है और इस तरह की खबरों के लिए जुड़े रहें हमारे साथ। 

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