MP पटवारी परीक्षा के 2 आरोपी गिरफ्तार, देखिए कौन है इस मामले का मास्टरमाइंड?

MP पटवारी परीक्षा धांधली: मध्यप्रदेश में पटवारी परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद हर दिन धोखाधड़ी और धांधली का एक नया मामला सामने आ रहा है। जिसमें सबसे पहले 10 में से 7 टॉपर्स एक ही परीक्षा केंद्र से, फिर 15 लाख रुपए की रिश्वत का मामला समाने आया और फिर एक जिले से एक ही समाज के अभ्यर्थियों के चयन का मामला सामने आया। इसके बाद में दिव्यांग अभ्यर्थियों का राज्य के वन रक्षक भर्ती में फिट और पटवारी में दिव्यांग कोटा आखिर यह कैसे। ग्वालियर से लेकर भोपाल और इंदौर तक इस मामले के तार जुडे बताए जा रहे है और यही एक कारण है कि पिछले 15 दिनों से छात्रों द्वारा सड़कों पर प्रदर्शन जारी है। आइए जानते है अब तक क्या सबूत इस मामले के खिलाफ मिले हुए हैं।

परीक्षा के पहले पकड़े गए 2 युवक

पटवारी परीक्षा की धांधली के संबंध में ग्वालियर का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें यह बताया गया की मध्यप्रदेश पुलिस ने परीक्षा प्रारंभ होने के 5 दिन पहले ही एक मामला दर्ज किया था। जिसमें 2 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होकर धोखाधड़ी को अंजाम देने की प्लानिंग में थे। इसके लिए दोनो युवक पटवारी परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी ऑफसेट प्रिंटिंग के आधार पर कुछ सबूत जुटा रहे थे। इस पूरे मामले की जांच पड़ताल के बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने तत्काल कार्यवाही कर इन दोनों युवकों को ग्वालियर के थाटीपुर इलाके से हिरासत में लिया।

पुलिस द्वारा 2 युवकों को पकड़े जाने पर जब पूछताछ की गई और फिर जब बात समाने आई वह सबको हैरान कर देने वाली थी। दोनों युवकों ने पुलिस को बताया कि, पटवारी परीक्षा में वास्तविक परीक्षार्थियों की जगह पर सॉल्वर को बैठाना उनकी रणनीति का एक हिस्सा था इसके लिए आधार कार्ड में फिंगरप्रिंट को बदलने वाले थे लेकिन जैसे ही उन्होंने इस काम को प्रारंभ किया इस वक्त पर पुलिस आ गई और ग्वालियर से उनको गिरफ्तार कर लिया गया।

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ग्वालियर के थाना अपराध शाखा उपनिरीक्षक शिशिर तिवारी की ओर से जब एफआईआर दर्ज की गई और जांच में जो मामला सामने आया उसके अनुसार अभियुक्तगण मनीष शर्मा वीरभान बंसल सहित अभियुक्त रिंकू रावत, कृष्णवीर जाट और संदीप सिंह को इस मामले में संदिग्ध पाए जाने पर गिरफ्तार किया गया है और जानकारी हासिल की जा रही है।

जमानत पर रिहा हुए पटवारी परीक्षा के आरोपी

10 अप्रैल को पटवारी परीक्षा हुई जिसमें ये दोनों छात्र परीक्षा में शामिल होने से वंचित रह गए क्योंकि ये दोनों आरोपी इस वक्त तक पुलिस के हिरासत में थे। लेकिन इसके बाद यह मामला ग्वालियर के हाईकोर्ट तक जा पहुंचा और दोनों आरोपी को 10 जून को जमानत पर रिहा कर दिया गया। और आरोपियों को जमानत मिलने और पूरी पूछताछ ना करने पर युवाओं में आक्रोश देखा जा सकता है और इस पूरे मामले को देखते हुए युवा पुलिस प्रशासन पर भी सवाल उठा रहे हैं।

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